संस्कृति, संस्कृत, संस्कार

संत श्री ओधवराम वैदिक गुरुकुल

भवानीपर, कच्छ

एक आधुनिक नालंदा। एक प्राचीन गुरुकुल।

प्राचीन ज्ञान का संरक्षण। भविष्य के लिए तैयार भारत का निर्माण।

धर्म और प्रकृति में निहित वैदिक गुरुकुल

कच्छ के भवानीपर में स्थित एक आवासीय गुरुकुल, जहाँ ब्रह्मचारी प्रकृति की लय के साथ जीते हुए वेद, संस्कृत और आधुनिक विषयों का अध्ययन करते हैं।

वर्तमान विद्यार्थी
45
वर्तमान विद्यार्थी
शिक्षक एवं आचार्य
6
शिक्षक एवं आचार्य
गुरुकुल का शैक्षणिक कार्य
20 वर्ष
गुरुकुल का शैक्षणिक कार्य
ट्रस्ट की स्थापना
1993
ट्रस्ट की स्थापना

परिचय

गुरुकुल परिचय

संत श्री ओधवराम वैदिक गुरुकुल, भवानीपर, वैदिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर चरित्रवान और सक्षम ब्रह्मचारियों के निर्माण के लिए समर्पित है। यह गुरुकुल पारंपरिक गुरुकुलम प्रणाली का अनुसरण करता है, जहाँ शिक्षा दैनिक जीवन, सेवा और आध्यात्मिक साधना के साथ एकीकृत होती है।

परिसर में उपलब्ध

  • कक्षाएँ
  • छात्रावास
  • प्रार्थना कक्ष
  • रसोई
  • उद्यान

गुरुकुल का संचालन श्री नित्यानन्द शिवानन्द सरस्वती योग निकेतन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

सभागार में मंत्र पाठमंडप में संगीत अभ्यासदूरबीन से तारों का अवलोकन

हमारी प्रेरणा

गुरुकुल उन आचार्यों और सुधारकों के पदचिह्नों पर चलता है जिन्होंने वैदिक शिक्षा को पुनर्जीवित किया और राष्ट्र की सेवा की।

संत श्री ओधवराम वैदिक गुरुकुल — महर्षि दयानन्द सरस्वती, स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती, श्यामजी कृष्ण वर्मा, संत ओधवराम जी, श्री नित्यानन्द शिवानन्द सरस्वती
  • महर्षि दयानन्द सरस्वती

    आर्य समाज के संस्थापक, जिन्होंने ‘वेदों की ओर लौटो’ का आह्वान किया

  • स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती

    गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक, जिन्होंने गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित किया

  • श्यामजी कृष्ण वर्मा

    संस्कृत विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी, कच्छ के मांडवी में जन्मे

  • संत ओधवराम जी

    वे संत जिनके नाम पर यह गुरुकुल स्थापित है

  • श्री नित्यानन्द शिवानन्द सरस्वती

    गुरुकुल संस्थापक

दृष्टि

हमारी दृष्टि

एक ऐसे आदर्श गुरुकुल का निर्माण करना जहाँ वैदिक ज्ञान, चरित्र, आधुनिक शैक्षणिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक चिंतन, प्रकृति-आधारित जीवन और आत्मनिर्भरता एक साथ मिलकर ऐसे प्रबुद्ध, संस्कारित और भविष्य के लिए तैयार विद्यार्थियों का निर्माण करें जो भारत और विश्व की सेवा करें।

हमारा ध्येय

  1. सीखना

    वैदिक और समकालीन शिक्षा के माध्यम से

  2. सोचना

    विज्ञान, जिज्ञासा और नवाचार के माध्यम से

  3. जीना

    अनुशासन, प्रकृति और आत्मनिर्भरता के साथ

  4. सृजन

    कौशल, तकनीक और अनुभवात्मक शिक्षा के माध्यम से

  5. सेवा

    चरित्र, उत्तरदायित्व और करुणा के साथ

गुरुकुल केवल सफल विद्यार्थी नहीं, बल्कि सक्षम और उत्तरदायी मनुष्य तैयार करना चाहता है।

यह गुरुकुल प्रकृति से अलग कोई विद्यालय नहीं है—यहाँ प्रकृति ही शिक्षक है। बच्चे सूर्य, ऋतुओं, मिट्टी, पशुओं और स्वयं के साथ जीवन जीकर सीखते हैं।

यह परिसर एक जीवंत जीव की भांति कार्य करता है जहाँ आध्यात्म, पारिस्थितिकी, शिक्षा और दैनिक जीवन अविभाज्य हैं।

मूल दर्शन

जीवो जीवस्य जीवनम्

समस्त जीवन जीवन से ही पोषित है।

बाल-केंद्रित शिक्षण उद्देश्य

  • अवलोकन, सहभागिता और सेवा के माध्यम से शिक्षा
  • भावनात्मक सुरक्षा, सरलता और अपनापन
  • जिज्ञासा आधारित, गैर-प्रतिस्पर्धी शिक्षा
  • शरीर, मन, हृदय और आत्मा का समन्वय

बच्चे भोजन उगाते हैं, जल संचित करते हैं, पशुओं की सेवा करते हैं, जप, गायन, प्रश्न, खेल और मौन का अभ्यास करते हैं।

जीवंत मंडल के रूप में परिसर

  • ब्रह्मस्थान को आध्यात्मिक केंद्र मानते हुए वास्तु आधारित योजना
  • परमाकल्चर ज़ोनिंग
  • कच्छ की स्थानीय पारिस्थितिकी
  • सुरक्षित, पैदल चलने योग्य और वृत्ताकार बाल-अनुकूल व्यवस्था
परिसर की दीवार पर भित्तिचित्र

यह गुरुकुल बच्चों को दुनिया के लिए तैयार नहीं करता, बल्कि बच्चों के माध्यम से दुनिया को तैयार करता है।

शिक्षा

शिक्षा और गतिविधियाँ

ज्ञान में निहित। भविष्य के लिए प्रासंगिक।

  • वैदिक ज्ञान

    संस्कृत · वेद · श्लोक · भारतीय दर्शन

  • शैक्षणिक अध्ययन

    गणित · विज्ञान · भाषाएँ · समकालीन शिक्षा

  • अनुभवात्मक शिक्षा

    प्रोजेक्ट · प्रयोग · स्वयं करके सीखना

  • प्रकृति के साथ जीवन

    खेती · उद्यान · सततता · आत्मनिर्भरता

  • शारीरिक एवं आंतरिक संस्कार

    योग · सूर्य नमस्कार · पारंपरिक भारतीय खेल · अनुशासन

वैदिक मंत्रोच्चार, संस्कृत और शास्त्र अध्ययन

प्रतिदिन प्रातः और सायं संध्या एवं हवन, तथा दैनिक कक्षाओं में वैदिक मंत्रोच्चार, संस्कृत और शास्त्रों का अध्ययन।

आधुनिक शिक्षा और कंप्यूटर प्रशिक्षण

प्रातः और अपराह्न में नियमित कक्षाएँ, तथा प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को कम्प्यूटर कक्षा।

योग, आयुर्वेद और शारीरिक अनुशासन

प्रतिदिन प्रातः 05:45 से व्यायाम और प्राणायाम, संतुलित दिनचर्या और परिसर के लिए श्रमदान।

संगीत, कला, खेल और व्यक्तित्व विकास

मंगलवार और शुक्रवार को संगीत, बुधवार और शनिवार को चित्रकला, और प्रतिदिन संध्या को अलग खेल — फुटबॉल से लेकर मलखंभ और धनुर्विद्या तक।

विज्ञान

विज्ञान, तकनीक एवं रोबोटिक्स

वेदों के साथ-साथ ब्रह्मचारी कम्प्यूटर कक्ष और मैदान में अपने स्वयं के प्रोजेक्ट बनाते, जोड़ते और प्रोग्राम करते हैं।

  • आर्डुइनो सर्किट और सेंसर
  • दृष्टिबाधितों के लिए स्मार्ट छड़ी
  • स्वचालित पौध सिंचाई
  • रोबोट कार और ड्रोन
  • दृष्टिबाधितों के लिए स्मार्ट छड़ी · 16s
  • मैदान में ड्रोन उड़ाते हुए · 22s
  • कम्प्यूटर कक्ष में प्रोग्रामिंग · 57s
  • स्मार्ट घर का मॉडल · 37s
  • आर्डुइनो से सर्किट बनाते हुए · 9s
  • जल सेंसर का परीक्षण · 7s
  • स्वचालित पौध सिंचाई प्रणाली · 47s
  • एलसीडी डिस्प्ले की प्रोग्रामिंग · 5s
  • कम्प्यूटर कक्ष में कक्षा · 4s
  • टैबलेट से रोबोट कार चलाते हुए · 54s
  • हाथ के इशारे से चलने वाला सेंसर प्रोजेक्ट · 5s
  • स्मार्ट छड़ी की प्रस्तुति · 37s
  • कम्प्यूटर पर मिलकर सीखते हुए · 35s

दिनचर्या

दैनिक दिनचर्या

गुरुकुल में ब्रह्म मुहूर्त से प्रारंभ होने वाली अनुशासित दिनचर्या का पालन किया जाता है।

समयदिनचर्या
05:00 – 05:15प्रातः जागरण एवं प्रार्थना
05:15 – 05:45शौचादि से निवृत्ति
05:45 – 06:30व्यायाम प्राणायाम
06:30 – 08:00स्नान एवं संध्या हवन
08:00 – 08:30प्रातराश
08:30 – 12:00प्रार्थना एवं कक्षा
12:00 – 13:00भोजन एवं विश्राम
13:00 – 14:00कम्प्यूटर, संगीत, चित्रकला कक्षा
14:00 – 16:00कक्षा
16:00 – 16:30श्रमदान
16:30 – 18:00खेल एवं व्यक्तिगत कार्य
18:00 – 19:15स्नान एवं संध्या हवन
19:15 – 20:00भोजन एवं भ्रमण
20:00 – 21:30स्वाध्याय
21:00 – 05:00प्रार्थना एवं शयन

प्रतिदिन रात्रि 21:00 – 21:10: आत्मचिंतन।

कौशल कक्षाएँ · 13:00 – 14:00

  • कम्प्यूटर कक्षासोमवार, गुरुवार
  • संगीत कक्षामंगलवार, शुक्रवार
  • चित्रकला कक्षाबुधवार, शनिवार

खेल दिनचर्या · 16:30 – 18:00

वारखेल
सोमवारफुटबॉल, वॉलीबॉल
मंगलवारबैडमिंटन
बुधवारएयरगन
गुरुवारअखाड़ा, मलखंभ
शुक्रवारलाठी, तलवार प्रशिक्षण
शनिवारधनुष बाण
रविवारक्रिकेट
दिनचर्या PDF डाउनलोड करें

हमारे आचार्य

प्रातः प्रार्थना से सायं संध्या तक ब्रह्मचारियों की दिनचर्या का मार्गदर्शन उनके आचार्य करते हैं।

  • आचार्य गौरव आर्य

    प्रातः प्रार्थना, हवन, श्रमदान और खेल

  • उपाचार्य विवेक शास्त्री

    व्यायाम-प्राणायाम, कक्षाएँ और सायं संध्या

  • अध्यापक सागर आर्य

    प्रातराश, भोजन और भ्रमण

मीडिया एवं लाइव

गुरुकुल के लाइव प्रसारण और लघु वीडियो देखें।

समाचार एवं कार्यक्रम

गुरुकुल में क्या हो रहा है।

  • हमारी नई वेबसाइट शुरू हुई

    गुरुकुल अब अंग्रेज़ी, हिंदी और गुजराती में ऑनलाइन है। समाचार, कार्यक्रम और चित्र यहाँ प्रकाशित किए जाएँगे।

ट्रस्ट

गुरुकुल का संचालन श्री नित्यानन्द शिवानन्द सरस्वती योग निकेतन ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

स्थापना सन्
1993
रजि. नं.
ए-1441/कच्छ
आयकर छूट
80G, नं. 4/5 80G(5), दिनांक 27-10-1992

उद्देश्य

संस्कृति, संस्कृत, संस्कार

  1. 1. वैदिक शिक्षा का प्रसार करना
  2. 2. संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करना
  3. 3. भारतीय संस्कृति का संरक्षण करना
  4. 4. चरित्रवान विद्यार्थियों का निर्माण करना
  5. 5. आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास करना
  6. 6. अनुशासन एवं आत्मनिर्भरता विकसित करना
  7. 7. समाजसेवा की भावना जागृत करना
  8. 8. गुरुकुल परंपरा को सशक्त बनाना
  9. 9. आधुनिक एवं वैदिक शिक्षा का समन्वय करना
  10. 10. राष्ट्रहित एवं मानव कल्याण हेतु कार्य करना
  11. 11. पर्यावरण एवं गौसंरक्षण को बढ़ावा देना
  12. 12. ज्ञान, सेवा और संस्कार का प्रसार करना

ट्रस्टीगण

  1. 1.श्री भाईलाल लखमशी मंगे (मंगलभाई)फाउंडर ट्रस्टी
  2. 2.श्री शंकरलाल देवजी भानुशाली
  3. 3.श्री शंकरलाल लखमशी जोईसर
  4. 4.श्री मथुरादास मोनजी भानुशाली
  5. 5.श्री मथुराभाई परागजी जोईसर
  6. 6.श्री सुरेश हंसराज दामा
  7. 7.श्री वाडीलाल परबत पोकार
  8. 8.श्री जगदीश ईश्वरलाल केसराणी
  9. 9.श्री अमृतकुमार कानजी दामा
  10. 10.श्री प्रेमल प्रताप जोईसर
  11. 11.श्री विशाल महिंद्र गडा

भविष्य

भविष्य का निर्माण

एक नींव रखी जा चुकी है। अब भविष्य के निर्माण का अवसर है — एक ऐसा परिसर जहाँ हर सुविधा बालक की सीखने, सोचने, सृजन करने और योगदान देने की क्षमता को बढ़ाए।

सीएसआर निवेश के क्षेत्र

  1. 01परिसर एवं मूल अवसंरचना
  2. 02शिक्षा एवं उत्कृष्टता केंद्र
  3. 03डिजिटल गुरुकुल
  4. 04जीवन एवं आत्मनिर्भरता
  5. 05खेल, संस्कृति एवं स्वास्थ्य
  6. 06हरित एवं सतत गुरुकुल
कुल सीएसआर आवश्यकता₹1.80 करोड़

मास्टर प्लान में शामिल

  • खुले अध्ययन स्थल
  • भोजनालय
  • स्नान सुविधाएँ
  • अनाज भंडारण
  • औषधीय उद्यान
  • पोषण उद्यान
  • वृक्षारोपण
  • अपशिष्ट प्रबंधन
  • भू-दृश्य

परिसर का मास्टर प्लान वास्तुकार के साथ तैयार किया जा रहा है।

रोबोटिक्स, एआई एवं नवाचार केंद्र

तकनीक सीखने से तकनीक रचने तक। रोबोटिक्स और नई तकनीक में प्रत्यक्ष कार्य के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र।

  • रोबोटिक्स वर्कस्टेशन
  • आर्डुइनो एवं आईओटी किट
  • एआई शिक्षण उपकरण
  • ड्रोन तकनीक
  • 3D प्रिंटिंग
  • कोडिंग एवं प्रोग्रामिंग क्षेत्र
  • विद्यार्थी नवाचार एवं प्रोजेक्ट प्रदर्शन
  • डिजिटल शिक्षण व्यवस्था
कुल परियोजना लागत
₹30 लाख
अपेक्षित सीएसआर योगदान
₹9 लाख प्रति वर्ष
प्रति वर्ष लाभान्वित विद्यार्थी
75

आप कैसे सहयोग कर सकते हैं

  • एक घटक में सहयोग

    ₹25 लाख+

    किसी विशेष अवसंरचना या उपकरण में सहयोग करें।

  • एक सुविधा प्रायोजित करें

    ₹50 लाख+

    एक पहचान योग्य शैक्षणिक सुविधा के निर्माण में सहायता करें।

  • परिवर्तनकारी सहभागी बनें

    ₹1 करोड़+

    परिसर विकास के एक बड़े कार्यक्रम में सहयोग करें।

प्रायोजन स्तर उदाहरण मात्र हैं और ट्रस्ट की स्वीकृति के अधीन हैं। सीएसआर साझेदारी किसी विशेष परियोजना, सुविधा, उपकरण या परिसर क्षेत्र के अनुसार भी तय की जा सकती है।

सहयोग

सहयोग और दान

आपका सहयोग गुरुकुल की शैक्षणिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय पहलों को सशक्त बनाता है।

क्यूआर द्वारा दान

क्यूआर द्वारा दान

किसी भी यूपीआई ऐप से स्कैन करें। आप 8305209795 पर यूपीआई द्वारा भी भेज सकते हैं।

बैंक विवरण

बैंक
जनकल्याण सहकारी बैंक लिमिटेड
खाता नाम
श्री नित्यानंद शिवानंद सरस्वती योग
खाता संख्या
00801010005422
आईएफएससी कोड
JSBL0000008

दान आयकर अधिनियम की धारा 80G के अंतर्गत कर छूट के पात्र हैं।

दान के बाद कृपया व्हाट्सएप पर विवरण भेजें, ताकि हम आपका आभार व्यक्त कर सकें।

व्हाट्सएप पर विवरण भेजें

संपर्क

भ्रमण एवं पूछताछ

अपने बालक के लिए गुरुकुल पर विचार कर रहे अभिभावक, तथा भ्रमण के इच्छुक शुभचिंतक, हमसे संपर्क कर सकते हैं। पूछताछ फॉर्म भरें, कॉल करें या व्हाट्सएप संदेश भेजें।